श्री कनकधारा स्तोत्रम् (संस्कृत हिन्दी पाठ)
श्री कनकधारा स्तोत्रम् (संस्कृत हिन्दी पाठ) श्री कनकधारा स्तोत्रम् (संस्कृत हिन्दी पाठ) अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम। अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।। * जैसे भ्रमरी अधखिले कुसुमों से अलंकृत तमाल-तरु का आश्रय लेती है, उसी प्रकार जो प्रकाश श्रीहरि के रोमांच से सुशोभित श्रीअंगों पर निरंतर पड़ता रहता है तथा जिसमें संपूर्ण ऐश्वर्य का…
