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IPAC छापेमारी केस में ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- लोकतंत्र को खतरे में डाला

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में गुरुवार को पहले दौर के विधानसभा चुनाव के तहत 152 सीट पर वोटिंग होनी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को I-PAC छापे के दौरान पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के वहां पहुंचकर कुछ कागजात ले जाने के मामले में फटकार लगाते हुए सख्त टिप्पणी की।

ईडी की ओर से इस मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि ये खुद में ऐसे व्यक्ति का काम है, जो संयोग से सीएम भी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि उन्होंने पूरे सिस्टम का इस्तेमाल कर लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी राज्य का सीएम जांच के बीच में किसी जगह इस तरह नहीं घुस सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कोई सीएम किसी केंद्रीय एजेंसी की ओर से जारी जांच में दखल देता है, तो इसे केंद्र और राज्य सरकार का झगड़ा नहीं कहा जा सकता।

पश्चिम बंगाल सरकार की वकील और टीएमसी सांसद मेनका गुरुस्वामी ने ईडी की तरफ से दाखिल रिट याचिका की स्वीकार्यता पर संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सवाल उठाया। उनका कहना था कि ये केंद्र और राज्य का विवाद है। इसलिए अनुच्छेद 32 की जगह अनुच्छेद 131 के तहत केस होना चाहिए।

इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र ने पूछा कि इसमें राज्य का कौन सा अधिकार है? उन्होंने कहा कि ये केंद्र और राज्य का विवाद नहीं, आप ऐसे बीच में दखल नहीं दे सकते। कोर्ट ने कहा कि राज्य की सीएम जांच के बीच चली आती हैं और आप कह रही हैं कि ये केंद्र और राज्य का विवाद है?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सख्त लहजे में कहा कि आप लोकतंत्र को खतरे में डाल देते हैं और फिर दलील देते हैं कि ये केंद्र और राज्य का विवाद है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने केशवानंद भारती और सीरवई मामलों का हवाला दिया, लेकिन उस वक्त किसी ने ऐसे हालात की कल्पना नहीं की होगी कि इस देश में ऐसा दिन भी आएगा, जब कोई मौजूदा सीएम किसी दूसरी एजेंसी के दफ्तर में यूं ही चली आएंगी।

बेंच को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि पश्चिम बंगाल की सीएम ने ईडी की कार्रवाई के दौरान कुछ आपत्तिजनक सामग्री वहां से हटा दी। ईडी ने याचिका में आईपीएसी छापे के दौरान रुकावट डालने का आरोप लगाकर ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के पुलिस अफसरों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है। साथ ही पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को भी ईडी ने चुनौती दी है।

 

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