मध्यप्रदेश

मैं जहां भी हूं, मुझे मेरी मां की दुआओं का असर लगता है…

Spread the love

मिस्टर एंड मिस आइकॉन मध्यप्रदेश के फिनाले में प्रथम रहीं दीपिका मिनाक्षी से खास टेलीफोनिक साक्षात्कार

‘सपनों’ के सफर पर…

मैं अपनी बात शुरू करूं उसके पहले कुछ कहना चाहती हूं जो मुझे हमेशा महसूस होता है- सख्त से सख्त राहों में भी जिंदगी का सफर आसाना लगता है, मैं जहां भी हूं, जो भी मैंने पाया है, वह मुझे मेरी मां की दुआओं का असर लगता है। यह बात हमेशा मेरे जहन रहती है कि मेरी मां मेरे साथ हैं। मैंने अपने जीवन में निर्णय लिया है कि मुझे बस अपनी मां का सपना पूरा करना है इसलिए मैंने यह मॉडलिंग की फिल्ड चुनी है।

जब मां दुनिया में नहीं हैं तो मेरा यह कर्तव्य है कि मैं इसे जरूर पूरा करूं, बचपन में ही मैंने अपनी मां को खो दिया, लेकिन मुझे लगता है कि हमेशा वो मेरे साथ में है, उनका अहसास मुझे होता है, और वो मुझे हर दिन प्रेरणा देती हैं। मां ने बचपन में एक बात कही थी, जब तुम्हारी आंखों में आंसू आते हैं तो तुम्हें कितना बुरा लगता है, वैसे ही किसी और की आंखों में तुम्हारे कारण आंसू नहीं आए, इस बात का ख्याल रखना। वो बात हमेशा मुझे याद रही है।

मिस्टर एंड मिस आइकॉन मध्यप्रदेश के मिस मध्यप्रदेश फिनाले में मैंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह एक सफर की शुरुआत हुई है। मुझे अभी आगे का रास्ता और तय करना है, मुझे बहुत कुछ करना है दूसरों के लिए, हम अपने लिए जिए तो क्या जिए दूसरों को खुशी मिले ऐसा कुछ कर गुजरना है। इंदौर शहर में यह कॉम्पिटिशन हुआ और मैं भाग्यशाली हूं कि मां अहिल्या की नगरी में मैंने प्रथम स्थान प्राप्त किया और अपने जीवन की एक नई दिशा की शुरुआत की। यह बात बचपन से ही मेरे जहन में रहा करती थी, मां का सपना था मैं एक दिन पूरे देश में जानी जाऊं और उनका यह सपना मैंने अपना उद्देश्य बनाया और उसी के लिए मैं प्रयास कर रही हूं।

इंदौर मुझे बहुत अच्छा लगा, यह राजमाता अहिल्या देवी बाई होलकर का शहर है और अहिल्या माता महाराष्ट्रीयन का गौरव हैं और प्रेरणास्त्रोत हैं। मैं अपने स्वभाव की बात कहती हूं मैं मेरा हर जन्मदिन वृद्धाश्रम और अनाथालय में मनाती हूं, उन सबके साथ अपना समय देकर और ज्यादा खुद को पॉजिटिव और खुश महसूस करती हूं, वो बच्चे जब खुश होते तो मुझे बहुत अच्छा लगता है।

एक और बात जो अब तक बताई नहीं अनाथ आश्रम से मेरा रिश्ता पुराना है मैंने अपने जीवन का कुछ समय अनाथ आश्रम में रह कर ही गुजारा है, इसलिए भी वह मुझे अपना सा लगता है। मेरा सपना है कि मैं अपनी मां के नाम से एक वद्धाश्रम बनाऊं और माताओं की सेवा करूं, उनकी जरूरतों को पूरा करूं, अगर यह कहूं कि मेरे जीवन का लक्ष्य भी है तो यह कहना गलत नहीं होगा। मैं अपने काम के द्वारा अर्जित की गई धनराशि को भी अनाथ आश्रम व वृद्धाश्रम में खर्च करती हूं ताकि वहां रहने वालों को कुछ हद तक परेशानी कम हो और उन्हें खुश देखकर आत्मशांति के अनुभव को महसूस करती हूं। मेरा स्वभाव ऐसा है कि यदि मैं अपने आधे से आधा बांटकर भी खा लूं तो मुझे लगता है आज मेरा दिन बन गया।

जो भी करें पूरे आत्मविश्वास के साथ करें…

मैं जिस गांव से हूं वहां लड़कियों को इतनी आजादी अभी भी नहीं है कि वो मॉडलिंग की फील्ड चुने, वैसे भी मॉडलिंग फील्ड को अलग नजरिये से देखा जाता है, और जब मैं अपनी मां का सपना पूरा करूं तो वहां उस गांव की लड़कियों के लिए भी पे्ररणा होगी और उन्हें भी लगेगा की जब ये कर सकती है तो हम क्यों नहीं। सबको प्रेरणा मिले ताकि सब एक मुकाम हासिल कर सके। मैं अपनी मां की तरह ही सेमी क्लासिकल डांसर भी हूं, एक किस्सा बताती हूं औरंगाबाद में नेशनल चैनल द्वारा एक डांस आॅडिशन हुआ था मैंने भाग लिया था और वह जीता भी था। मैंने देश की जानी-मानी हस्ती से अवॉर्ड भी हासिल किया, लेकिन आगे मामला कुछ बन नहीं पाया, मैंने कॉल भी किया और कहा कि मैं तो आॅडिशन में पास हो गई थी लेकिन वहां जो बीच के लोग थे उन्होंने मुझसे डेढ़ लाख रुपयों की मांग की, उस दिन मैं बहुत दुखी हुई और मुझे लगा टैलेंट की कोई कदर नहीं, तब बस डांस से नफरत हो गई, उस घटना ने मुझे भीतर तक झकझौर दिया और मैंने डांस को आगे नहीं करने का निर्णय लिया। इसलिए मैंने मॉडलिंग की फिल्ड चुनी है और किस्मत की बात है कि मैंने पहली बार में सफलता का स्वाद चखा, यह सब मां का आशीर्वाद सा लगता है। एक छोटा सी घटना बताती हूं, जिस दिन मैं मिस्टर एंड मिस आइकॉन मध्यप्रदेश विनर बनी थी, उस दिन फोटोशूट हो रहा था, पास ही में एक महिला का पैर कहीं अटक गया था और वे गिर गई थी, तो मैंने फोटोशूट को छोड़कर क्राउन के साथ ही उन्होंने उठाने चली गई, उन्हे उठाया, तो वहां जितने भी पार्टीसिपेंट्स थे उनका ध्यान मुझ पर गया कि मैं यह क्या करने चली गई, उन्होंने मुझे कहा अरे, आप कैसी हो आपका यहां पर फोटोशूट चल रहा है और वहां चलीं गई, लेकिन मुझे याद ही नहीं रहा मुझे बस यही लगा वो गिर गईं हैं उन्हें मुझे उठाना है बस और कुछ नहीं रहा याद।

यह कहूंगी कि मैंने किसी पर किसी प्रकार का कोई एहसान नहीं किया। बस दिल को लगा और मैंने कर दिया। जो किया खुद के लिए किया। भीतर से आवाज आई उन्हें उठाना है और में दौड़ी चली गई। मैं मां पर कुछ कहना चाहती हूं इन पंक्तियों के माध्यम से “मैं मांगती हूं मन्नत की फिर यही जहां मिले, फिर वही गोद मिले और फिर वही मां मिले। मेरा जीवन मेरी मां को समर्पित है। मां के जाने के बाद बहुत अकेली पड़ गई थीं। मैं सात साल की थीं और मां दुनिया से चल बसीं, जब वह इस दुनिया में थी और टीवी पर संगीत का कार्यक्रम आता था तब मां कहती थी मेरी बेटी को भी मैं टीवी पर ऐसे देखना चाहती हूं, तब मैं वह बात सुनती थी तो मुझे बचपन से ही यह ख्याल बना रहा और मैंने मां को खोया लेकिन मां की सभी इच्छाओं को अपने पास रखा, मैं हमेशा तैयार हूं और एक दिन उनकी सभी इच्छाओं को जरूर पूरा करूंगी। मैंने मिस आईकॉन मध्यप्रदेश का अवॉर्ड जीता है जो ड्रेस मैंने पहनी थी उस ड्रेस का डिजाइन और स्टीच मैंने खुद ने की है। वह ड्रेस भी मेरे लिए लकी रही। आगे नेशनल कॉम्पिटिशन में मुझे हिस्सा लेना है। मिस्टर एंड मिस आॅइकॉन इंडिया से मुझे कॉल भी आया है कि आप नेशनल कॉम्पिटिशन के लिए चयनित हैं। आपको नेक्स्ट लेवल के लिए अपने आप को तैयार करना है, ईश्वर करे मैं अपनी मॉम का सपना जरूर पूरा करूं, कॉम्पिटिशन गोवा में होगा, वहां जाना है अक्टूबर में, आगे देखते हैं क्या होता है, तैयारी कर रही हूं अब आगे के लिए। मैंने जीवन की शुरुआती दौर से ही संघर्षों का सामना किया है मेरा जीवन आम लोगों की तरह कभी भी आसान नहीं रहा, जॉब करने के लिए भी रोजाना 8 किलोमीटर पैदल सफर किया है। इन कठिन हालातों के बावजूद भी कभी हिम्मत नहीं हारी, हर पल मां के साथ होने का अहसास मुझे रहा।

देश की सभी बेटियों से कहना चाहूंगी कि अपने मां-पिता के लिए आप कुछ ऐसा काम करो जिससे वे आप पर नाज करें और साथ वह गर्व से कह सके कि मेरी बेटी किसी बेटे से कम नहीं।

सफलता और विफलता ईश्वर के हाथ है हमारे पास है तो सिर्फ कर्म करने की शक्ति उसे पूरी श्रद्धा और आत्मविश्वास के साथ करें, तो एक न एक दिन आपको सफलता जरूर मिलती ही है। मेरा विश्वास है कि मैं अपने साथ-साथ अपने गांव और अपनी मां का नाम इस दुनिया में रोशन करूंगी, और जीवन को दूसरों की सेवा के लिए समर्पित करूंगी, ताकि जब मैं इस दुनिया से रुखसत लेकर अपनी मां से मिलने ईश्वर के पास जाऊंगी तो मां को जाकर यह बता सकूं कि मां मैंने आपका सपना पूरा किया। यह एक मशहूर शायर मुन्नवर राणा जी ने मां पर दो पंक्तियां जो बहुत सुंदर लिखी गई वो मैंने पढ़ी तो आपको कहती हूं- चलती-फिरती आंखों से अज़ां देखी है, मैंने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है।