
मुख्यमंत्री ने वीसी से 3 दिवसीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का किया शुभारंभ
देशभर के साहित्य क्षेत्रों के विद्वान, वक्ता, कलाकार, इतिहासकार महोत्सव में हुए शामिल
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सीतामऊ के महाराज कुमार श्री रघुवीर सिंह ने 1974 में नट नागर संस्थान की स्थापना की। यह संस्थान आज शोधार्थियों का तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है। संस्थान, 30 हजार दुर्लभ पांडुलिपियों होने से यह एशिया की लाइब्रेरी के रूप में विख्यात है। यहाँ से न सिर्फ भारतवर्ष के बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शोधार्थी विभिन्न विषयों से संबंधित पीएचडी का शोध भी करते है। संस्थान से इतिहासकार और हिंदी साहित्य जगत से श्री रामधारी सिंह दिनकर, श्रीमती महादेवी वर्मा, श्री सुमित्रानंदन पंत, श्री हजारी प्रसाद द्विवेदी आदि प्रसिद्ध नाम भी संबंधित है। संस्थान में महत्वपूर्ण पांडुलिपियों में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित कई दस्तावेजों के अतिरिक्त 1857 की क्रांति के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी संग्रहित है। यह संस्थान भारतीय इतिहास साहित्य और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र स्थल है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 दिवसीय द्वितीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से वर्चुअल शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महोत्सव में शामिल महानुभावों से कहा कि सांस्कृतिक पुनरुत्थान के इस पर्व में आपका स्वागत है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को आयोजित कर हजारों वर्षों से राष्ट्र और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी। सोमनाथ का उन्नत शिखर और आकाश में लहराता ध्वज हमें गर्व से भर देता है। इसी प्रकार नट नागर शोध संस्थान विश्व और राष्ट्र की अनमोल धरोहर है और तीर्थस्थल के समान है। सीतामऊ में स्थित यह अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थान हमारे गौरवशाली अतीत की विरासत से विकास तक की जानकारी रखता है।
द्वितीय सीतामऊ साहित्य महोत्सव का आयोजन सीतामऊ स्थित नट नागर शोध संस्थान में किया जा रहा है। देशभर से साहित्य क्षेत्रों के विद्वान, वक्ता, कलाकार, इतिहासकार महोत्सव में शामिल हो रहे है। साहित्य महोत्सव को “नॉलेज कुंभ” के रूप में विकसित किया गया है। इसमें स्कूल के बच्चों से तारामंडल संबंधी गतिविधियाँ आयोजित की जा रही है। महोत्सव में विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न स्टॉल भी लगाए गए है जिनमें पुस्तकें, पेंटिंग, दुपट्टे, रुमाल, स्थानीय उत्पाद एवं खाद्य सामग्री उपलब्ध रहेगी। साहित्य महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री हरदीप सिंह डंग, निदेशक अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं मानव संसाधन विभाग श्री राजेश कुमार, श्री विवेक चतुर्वेदी एवं बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी नागरिक उपस्थित रहे।
प्रथम दिवस के वक्ता एवं विषय
सीतामऊ साहित्य महोत्सव के प्रथम दिन 29 जनवरी को सर्वप्रथम श्री राजेश कुमार, निदेशक अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं मानव संसाधन, नई दिल्ली ने “इतिहास के पन्नो से” पर व्याख्यान दिया।
कवि और लेखक श्री विवेक चतुर्वेदी ने “शब्दों का जादू”, श्री मीर रंजन नेगी, भारतीय महिला राष्ट्रीय फील्ड हॉकी टीम के पूर्व कोच ने “खेल और जीवन”, श्री रघुबीर यादव भारतीय अभिनेता, कवि, संगीतकार ने “कथा और रंगमंच” पर व्याख्यान और जासु मंगानियार समूह ने स्वरांजलि पर प्रस्तुति दी।
दूसरे दिवस के वक्ता एवं विषय
महोत्सव के दूसरे दिन 30 जनवरी को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य श्री संजीव सान्याल “इतिहास का भूगोल” पर व्याख्यान देंगे। श्री आलोक श्रीवास्तव द्वारा “शब्दों का आलोक” पर व्याख्यान होगा। प्रो. रविन्द्र कुमार शर्मा द्वारा “भारतीय संस्कृति और इतिहास” पर व्याख्यान होगा। चंबल सफारी, मगरमच्छ और ऊदबिलाव देखने का जश्न मनाया जाएगा। कबीर स्टूडियो द्वारा “वेव्स में स्वरागिनी” पर प्रस्तुति दी जायेगी। विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में तारों का अवलोकन किया जाएगा।
तीसरे दिवस के वक्ता एवं विषय
महोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन 31 जनवरी को पद्मश्री ज्ञान चतुर्वेदी द्वारा “किस्से कहानियां”, श्री जेरी पिंटो, साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता द्वारा “किताबों की दुनिया” पर और श्री रज़ा काज़मी पर्यावरणविद्” पर्यावरण संरक्षण” पर व्याख्यान देंगे। श्री प्रशांत पांडे, फिल्मफेयर पुरस्कार विजेता द्वारा “सुवासरा से फिल्मफेयर तक का सफर” के बारे में बताएंगे।
साहित्य महोत्सव में मगरमच्छ और ऊदबिलाव देखना, चंबल नदी सफारी, अफीम और क्विनोआ के खेत का दौरा इत्यादि गतिविधियां भी आयोजित की जायेगी।




