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कुलदीप सेंगर को हाईकोर्ट से झटका, कस्टोडियल डेथ केस में सजा सस्पेंड करने से इनकार

नई दिल्ली। पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है। उन्नाव रेप केस पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई हत्या मामले में कुलदीप सेंगर को सुनाई गई 10 साल की सजा निलंबित करने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली कुलदीप सेंगर की याचिका खारिज कर दी है। 2020 में ट्रायल कोर्ट ने पूर्व विधायक को सजा सुनाई थी। इससे पहले 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में कुलदीप सेंगर की सजा पर रोक लगाने और जमानत दिए जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।

कोर्ट में दाखिल याचिका में कुलदीप सेंगर की ओर से यह दलील दी गई थी वो काफी लंबे समय से जेल में बंद हैं और उनकी स्वास्थ्य गिर रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा कि कुलदीप सेंगर की अपील याचिका पर निर्णय में देरी की वजह उनके द्वारा दाखिल की गई कई-कई अर्जियां हैं। दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत मामले में कुलदीप सेंगर के भाई अतुल सेंगर और पांच अन्य लोगों को भी ट्रायल कोर्ट ने 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई थी। इससे पहले जून 2024 में भी सेंगर की ऐसी ही एक याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।

अदालत ने कहा था कि सेंगर सजा सस्पेंड करने का हकदार नहीं है। हालांकि दुष्कर्म मामले में सुनाए गए उम्रकैद के फैसले को चुनौती देने वाली सेंगर की याचिका पर हाईकोर्ट ने पिछले महीने उसे जमानत दे दी थी और उसकी सजा भी निलंबित कर दी थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कुलदीप सेंगर सात साल से अधिक समय से जेल में है। उसकी अपील पर सुनवाई में काफी ज्यादा वक्त लग रहा है ऐसे में सेंगर के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इसके बाद इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई थी।

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