
इंदौर। जिले में जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल ने 40 बच्चों के जीवन की दिशा बदल दी। कभी सड़कों और चौराहों पर भिक्षावृत्ति में संलग्न रहने वाले परिवारों के ये बच्चे अब स्कूल की कक्षाओं में बैठकर अपने सपनों को आकार दे रहे हैं। भिक्षुक मुक्त इंदौर अभियान के अंतर्गत प्रशासन ने इन बच्चों की पहचान कर न केवल उनका पुनर्वास किया, बल्कि उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया।
सुदामा नगर स्थित शारदा माध्यमिक विद्यालय में बच्चों को उनकी आयु के अनुसार प्रवेश दिलाया गया। प्रवेश के साथ ही उन्हें स्कूल किट, यूनिफॉर्म और आवश्यक शिक्षण सामग्री प्रदान की गई, जिससे बच्चों और उनके परिजनों में उत्साह और आत्मविश्वास दोनों बढ़ा।
इस पहल का सबसे भावुक क्षण तब देखने को मिला जब बच्चे और उनके परिजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करने जनसुनवाई के दिन आज कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने बच्चों से आत्मीयता से मुलाकात की, उन्हें बिस्कुट और शिक्षण सामग्री वितरित की तथा पढ़ाई जारी रखने की प्रेरणा दी।
कलेक्टर श्री वर्मा ने बच्चों से कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो जीवन को बदल सकती है। उन्होंने बच्चों को स्वच्छता का महत्व समझाते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन, मेहनत और साफ-सफाई भी उतनी ही जरूरी है जितनी पढ़ाई। उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में बच्चों को जो भी आवश्यकता होगी, जिला प्रशासन उनके साथ खड़ा रहेगा।
इस पहल से बच्चों के माता-पिता के चेहरों पर भी उम्मीद की चमक दिखाई दी। जिन परिवारों के लिए रोज़ी-रोटी ही सबसे बड़ी चिंता थी, उनके बच्चों के हाथों में अब किताबें हैं और आंखों में भविष्य के सपने।
आज ये 40 बच्चे सिर्फ स्कूल में दाखिल नहीं हुए हैं, बल्कि उनके जीवन में सम्मान, अवसर और उम्मीद की एक नई शुरुआत हुई है। जिला प्रशासन की यह पहल साबित करती है कि यदि शासन और समाज मिलकर प्रयास करें तो भिक्षावृत्ति जैसी समस्या को भी शिक्षा के माध्यम से स्थायी रूप से कम किया जा सकता है।



