
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मालदा में प्रोटेस्ट के दौरान 7 जजों को बंधक बनाने की मामले की जांच नेशनल जांच एजेंसी यानी एनआईए करेगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी है। दरअसल मामले की सुनवाई करते हुए देश के शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि यह घटना राज्य प्रशासन की विफलता को भी उजागर करती है। वहीं दूसरी तरह मामले में कोलकाता पुलिस ने भी बड़ी कार्रवाई करेत हुए 2 टीएमसी पार्षदों सहित 6 लोगों पर FIR दर्ज की है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों (ज्यूडिशियल अफसर) के घेराव की जांच को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंप दी है। दिल्ली में चुनाव आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि एनआईए की एक टीम शुक्रवार को राज्य में मौजूद रहेगी।
2 अप्रैल को मामले में सुनवाई करते हुए सुपीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल को सबसे अधिक ध्रुवीकरण वाला राज्य बताया था। सुपीम कोर्ट ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान मालदा जिले में ज्यूडिशियल अफसरों के घेराव और हमले पर प्रशासन की विफलता और निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई थी और सीबीआई या एनआईए से जांच कराए जाने का निर्देश दिया था।
चुनाव आयोग ने दो अप्रैल (गुरुवार) को एनआईए को लिखे पत्र में न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए उसे बुधवार की घटना की जांच करने का निर्देश दिया। घेराव की घटना की कड़ी निंदा करते हुए न्यायालय ने कहा कि यह घटना राज्य प्रशासन की विफलता को भी उजागर करती है और ज्यूडिशियल अफसरों को धमकाने का न सिर्फ एक बेशर्म प्रयास था, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को चुनौती देने के बराबर भी था।
यह घटना मालदा जिले के कालियाचक इलाके में एसआईआर कवायद के दौरान हुई जब असामाजिक तत्वों ने बुधवार को एक खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यालय में अपराह्न साढ़े तीन बजे से सात ज्यूडिशियल अफसरों का घेराव किया था। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार आधी रात के आसपास सुरक्षा बलों ने उन ज्यूडिशियल अफसरों को मुक्त कराया, जिनका घेराव किया गया था।
इधर कोलकाता पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की है। कोलकाता पुलिस ने 31 मार्च और 1 अप्रैल को CEO बंगाल के दफ़्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के मामले में कोलकाता के 2 टीएमसी पार्षदों सहित 6 लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की है। टीएमसी पार्षद शांति रंजन कुंडू और सचिन सिंह पर केस दर्ज किया गया है। FIR में आरोप लगाया गया है कि 31 और 1 मार्च की दरमियानी रात को आरोपियों ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर, हरे स्ट्रीट और स्ट्रैंड रोड के चौराहे पर, ख़ास तौर पर शिपिंग कॉर्पोरेशन बिल्डिंग स्थित पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के दफ़्तर के सामने, एक गैर-कानूनी जमावड़ा बनाया।
टीएमसी नेताओं सहित 6 लोगों पर आरोप है कि पुलिस द्वारा बार-बार तितर-बितर होने की गुजारिश करने और कानूनी निर्देश दिए जाने के बावजूद, उन्होंने जान-बूझकर बात मानने से इनकार कर दिया और अपनी गैर-कानूनी गतिविधियां जारी रखीं। इससे सरकारी कर्मचारियों को अपने कानूनी फ़र्ज़ निभाने से रोका गया। एफआईआर में कहा गया है कि इस जमावड़े ने सार्वजनिक सड़क को आंशिक रूप से रोक दिया, जिससे सामान्य यातायात और लोगों की आवाजाही में रुकावट पैदा हुई। वे CEO, पश्चिम बंगाल के ख़िलाफ़ भड़काऊ और डराने वाले नारे भी लगा रहे थे।




