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ऊर्जा संकट के बीच सरकार का बड़ा बयान- देश में पेट्रोल-डीजल व एलपीजी की कोई कमी नहीं

नई दिल्ली। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव (विपणन एवं तेल शोधन) सुजाता शर्मा ने बताया है कि मिडिल ईस्ट संकट के मद्देनजर सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति के बजाय घरेलू उपभोक्ताओं को गैस देने में प्राथमिकता देने का निर्णय लिया था। शुरुआत में एलपीजी गैस की वाणिज्यिक आपूर्ति रोक दी गई, फिर धीरे-धीरे बहाल की गई। पहले 20%, फिर पीएनजी विस्तार के लिए व्यापार में सुगमता के आधार पर अतिरिक्त 10%, बाद में बढ़ाकर 50% और अब 70% कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई शुरू कर दी गई है।

संयुक्त सचिव ने बताया कि 14 मार्च से अब तक लगभग 30,000 टन व्यावसायिक एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है। इन निर्णयों को लेते समय सरकार ने रेस्तरां, सड़क किनारे के ढाबों, होटलों, औद्योगिक कैंटीनों और प्रवासी श्रमिकों को प्राथमिकता दी। आदेशों में इस्पात, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, रंग, रसायन और प्लास्टिक को भी प्राथमिकता देने का उल्लेख किया गया था। प्रवासी श्रमिकों को लगभग 30,000 छोटे 5-किलो के सिलेंडर वितरित किए गए। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि भारत में पर्याप्त कच्चा तेल, पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है। एलपीजी, एलएनजी और पीएनजी की आपूर्ति सुरक्षित है। कुछ स्थानों पर फैली अफवाहों के बावजूद, जिनके कारण पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं, कोई कमी नहीं है।

सरकार के मुताबिक मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने भारत की कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के साथ-साथ अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें भी बढ़ी हैं। हालांकि, भारत सरकार ने स्थिति को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए विभिन्न स्तरों पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। हमारे पास पर्याप्त कच्चा तेल भंडार है और अगले दो महीनों के लिए आपूर्ति की व्यवस्था है। एलपीजी और पीएनजी के मामले में भी स्थिति अनुकूल है। हमारी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं और घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 40% की वृद्धि हुई है।

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