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अमेरिका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलेंगे इमरान खान, कश्मीर मुद्दे पर हो सकती है बातचीत

वॉशिंगटन। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सोमवार रात को अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। इमरान संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका पहुंचे हुए हैं जो 24 सितंबर से शुरू होगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री 27 सितंबर को UNGA की बैठक को संबोधित भी करेंगे। दोनों नेताओं के बीच अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

जानकारी के मुताबिक दोनों नेताओं की मुलाकात रात करीब 10 बजे हो सकती है। ट्रंप और इमरान की मुलाकात ऐसे वक्त में हो रही है जब एक दिन पहले ही ह्यूस्टन में आयोजित ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में पूरी दुनिया ने प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की दोस्ती का जलवा देखा है।

भारत के प्रधानमंत्री ने अमेरिका में कहा कि इस्लामिक आतंकवाद से लड़ाई में डोनाल्ड ट्रंप पूरी तरह से भारत के साथ हैं। साथ ही पीएम मोदी ने इस मंच के जरिए कश्मीर के मुद्दे पर दखल देने के लिए पाकिस्तान पर निशाना साधा और कहा कि जो अपना घर नहीं संभाल पा रहे हैं उन्हें धारा 370 हटाने से दिक्कत हो रही है।

370 को भारत का आंतरिक मुद्दा बता चुके हैं ट्रंप
अमेरिका राष्ट्रपति भी जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसले पर भारत के साथ हैं और वह इसे भारत का आंतरिक मुद्दा बता चुके हैं। ऐसे में अमेरिका में भारत के प्रधानमंत्री का सम्मान और ट्रंप से उनके मजबूत रिश्ते पाकिस्तान के गले नहीं उतर रहे हैं। अब मुलाकात के दौरान इमरान खान के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को भारत के खिलाफ खड़ा करना काफी मुश्किल होगा।

इमरान खान और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बातचीत का मुख्य एजेंडा कश्मीर और अफगानिस्तान होगा। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है। पिछले हफ्ते दिए बयान में राष्ट्रपति ट्रंप कह चुके हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने इसके पीछे बैकडोर से अमेरिका की भूमिका की ओर भी इशारा किया था।

राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मुलाकात से पहले इमरान खान अमेरिका के अन्य नेताओं से मिलकर कश्मीर और अफगानिस्तान का मुद्दा उठा चुके हैं। साफ है कि इमरान खान के लिए ट्रंप के सामने अपनी डाल गलाना मुमिकन नहीं है और ऐसे में वह सिर्फ अमेरिका से कश्मीर के मुद्दे पर मध्यस्थता की गुहार फिर से लगा सकते हैं जिसे भारत किसी भी सूरत में स्वीकार करने वाला नहीं है।