
नई दिल्ली। उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश और दर्शन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से आज सुप्रीम कोर्ट ने इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं होता है। बेंच ने मंदिर प्रबंधन के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि मंदिर के गर्भगृह में कौन प्रवेश करेगा, यह तय करना कोर्ट का नहीं बल्कि मंदिर प्रशासन का काम है। बेंच ने याचिकाकर्ता को कहा कि वह मंदिर प्रशासन और सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठाएं।
सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इस प्रकार की याचिका दाखिल करने वाले लोग असली श्रद्धालु नहीं होते, बल्कि उनका उद्देश्य कुछ और होता है। अब हम इस पर आगे कुछ नहीं कहना चाहते। हम बस इतना कहेंगे कि मंदिर में प्रवेश संबंधी फैसला करना न्यायपालिका का काम नहीं है। याचिकाकर्ता का दावा है कि चुनिंदा वीआईपी पास के जरिए प्रवेश मंदिर में समानता का उल्लंघन है, क्योंकि आम जनता को इससे काफी परेशानी होती है।
याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने वकील विष्णु जैन के जरिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई इस याचिका में कहा था कि मंदिर की प्रशासनिक समिति वीआईपी भक्तों को पूजा के लिए अनुमति दे रही है जबकि सामान्य भक्तों को 2023 से ही इसकी इजाजत नहीं है। भक्तों के इस इस तरह का भेदभाव करने की इजाजत मंदिर समिति को नहीं दी जा सकती। उन्होंने मांग की मंदिर के गर्भगृह में सभी भक्तों को पूजा के लिए एक समान अवसर मिलना चाहिए।




